एक रहस्यमय कल्पना लोक- बटेश्वर मंदिर समूह
◆ बटेश्वर के मंदिर समूह ◆ __________________ राजस्थान और मध्यप्रदेश का सीमावर्ती प्रदेश जिसे सरसब्ज़ करती है माँ चर्मन्यवति यानी की चंबल। चंबल के कटाव के कारण यहाँ का भौतिक प्रदेश एक अलग ही विशेषता युक्त है। उबड़-खाबड़ और कटी-फटी घाटियां यहां एक विशाल क्षेत्र में फैली हुई हैं। इन्हें ही चंबल के बीहड़ कहा जाता है। ये बीहड़ एक विस्तृत भूल-भुलैया का निर्माण करते हैं इसलिए कुछ समय पहले तक यह स्थान दस्युओं का पंसदीदा स्थल था। इन्हीं खतरनाक बीहड़ों में ग्वालियर और मुरैना से लगभग 30 किलोमीटर दूर बीहड़ों के बीच घने जंगलों में बसा हुआ है बटेश्वर मंदिर समूह का अद्भुत सौन्दर्यलोक। गुर्जर-प्रतिहार कालीन लगभग दो सौ मंदिरों का यह मंदिर समूह गुर्जर-प्रतिहार कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मंदिर समूह के सबसे प्राचीन मंदिर लगभग सातवीं या आठवी शताब्दी के चिन्हित किये गए हैं। स्थानीय किवदंतियों के अनुसार यह स्थान प्राचीन काल मे गुरुकुल था। यहाँ अक्सर राजकुमार शिक्षा ग्रहण करनें के लिए आया करते थे और शिक्षा पूर्ण करनें के उपरांत वापिस घर जाते समय वे एक मंदिर का निर्माण स्मृति स्वरूप करवाते ...