◆माँ-बेटे के ममतामयी प्रेम की प्रतीक शिवपुरी की छतरियां◆
★माँ-बेटे के ममतामयी प्रेम की प्रतीक★
सिंधिया राजवंश की छतरियां
आपको यह जानकर शायद ताज्जुब होगा कि देश में ताजमहल जैसी कई खूबसूरत इमारतें हैं जैसे- शिवपुरी में सिंधिया राजवंश की संगमरमरी छतरियां।
ये मां बेटे के प्रेम की अनूठी मिसाल मानी जाती हैं। चांदनी रात को जगमग प्रकाश में इनका सौंदर्य और भी खिल उठता हैं। शानदार वास्तु शास्त्र से अभिप्रेरित ये भवन वास्तुकला की दृष्टि से अद्वितीय हैं। सम्पूर्ण परिसर में सुंदर उद्यान से घिरे इन भवनों की शोभा हरितम कांति में सफेद नग की भांति सुशोभित होती है।
माधवराव प्रथम ने अपनी मां की याद में छतरी का निर्माण कराया था। उनकी इच्छा थी कि जब उनकी मृत्यु हो, तब उनकी छतरी भी उनकी मां की छतरी के ठीक सामने इस तरह से स्थापित की जाएं कि वह अपनी मां के दर्शन कर सकें। यही कारण हैं कि मां-बेटे की छतरियों को इस तरह से बनाया गया है ताकि एक छतरी से दूसरी छतरी को साफ देखा जा सके।
पहली छतरी के निर्माण में स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण देखने को मिलता है। इसका निर्माण सफेद पत्थरों से कराया गया है। दूसरी छतरी का निर्माण पूरी तरह से संगमरमर से किया गया है। यहां संगमरमर के पत्थरों से ही प्रवेश द्वार भी बने हैं। दोनों भवनों के बीच में एक सुंदर कुंड नुमा जलाशय बना है जिसके बीच में एक बेहद सुंदर शिवलिंग स्थापित है। चाँदनी रात में जगमग करते इन भवनों का प्रतिबिंब जब इस कुण्ड की जलराशि में पड़ता है तो बेहद शानदार नजारा उत्पन्न होता है।
21 अगस्त, 1921 को राजमाता जीजाबाई की मूर्ति की स्थापना की गई थी, तो 6 जनवरी, 1926 को बेटे माधवराव प्रथम की मूर्ति की स्थापना की गई थी। प्रवेश द्वारों पर चांदी की परत भी चढ़ी हुई है। यहां हर सुबह आरती व शाम भजन भी प्रस्तुत किए जाते हैं।
पास ही एक प्राकृतिक स्थल भदैया कुंड भी बेहद रमणीक स्थल है। यहाँ के प्रसिद्ध पुरातत्विक और ऐतिहासिक स्थलों में तात्या टोपे स्मारक भी बेहद ही शानदार स्थल है। यह स्थान उनके शहीद स्थल के रुप मे जाना जाता है।
आपको एक बार अवश्य शिवपुरी का भ्रमण करना चाहिए।
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कुलदीप भार्गव
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